Thursday, 5 April 2018

The legendry "Faiz"

अब के यूं दिल को सजा दी हम ने 
उस की हेर बात भुला दी हम ने


एक एक फूल बहुत याद आया 
शाख -ऐ -गुल जब वो जला दी हम ने


आज तक जिस पे वो शर्माते हैं 
बात वो कब की भुला दी हम ने


शहर-ऐ-जहाँ राख से आबाद हुआ 
आग जब दिल की बुझा दी हम ने


आज फिर याद बहुत आया वो 
आज फिर उस को दुआ दी हम ने


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