Saturday, 31 March 2018

दूरी सही जाए ना।।

तू ना दूर है मझसे, ना मैं तुझसे दूर हुँ।
बस तू नही आती नजर, शायद ये मेरी नजर का कसूर है।।

न मैं तुझसे दूर हु  न तू मझसे दूर है।
पर नजर तू नही आती, शायद ये भी मेरी नजर का कुसूर है।।

न ही तो वो अजनबी था, ओर न ही कोई चश्म ए फ़रोश।।
दास्तान के दिल क्या बयान कर दिया, समझो दिल ने कोई गुनाह कर दिया।।

सितारे ए आफताब बुलंदियों पर है तुम्हारे,
जो तुम भी आज कल किस्से कहानियों में आने लगे।।

वक़्त ने  छीन लिया हमसे जिसको हम अपना समझा करते थे,
चिराग जो हाथो में लेकर रोज घिसा करते थे,
ये ना मालूम था सपने में थे हम,
हम तो बस उसकी खुशी की दुआ करते थे।।

पर दर्द ए तन्हाई ने जीना सिखा दिया,
चश्म के फ़रोश को अपना साथी बना लिया,
अब भी कहते हैं खुद से तेरी खैर।
तेरे ख्वाबो को मैने अपना सुरूर बना लिया।।

तू ही सहर , ओर तू ही शबनम,
तू ही खुशी थी, तू ही मेरा गम,
बात न फूलो की थी न कांटो की,
बात उस मुस्कुराहट की थी,
जिसके लिए मैं जिया करता था,
कसूर वक़्त का था या मेरा ये तो नही जानता,
बस इतना जानता हु की आज भी उसी खुशी, उसी मुस्कुराहट के लिए सब कुछ फिर से छोड़ सकता हु।।

वही शैतानियां,
वही बचकानी हरकतें,
वही इशारे,
वही रुसवाईयाँ,
वही हसी,
वही खुशी,
  वही सब फिर से वापस चाहता हु।

Thursday, 29 March 2018

नशे सी चढ़ गयी ओये

जब पी लेती है वो विस्की,
हो जाती फिर घनी रिस्की,
वोडका से ना होता घंटा असर,
पर बियर से वो जाती पसर।

टकीला जिस दिन मैंने पिलाया इसको,
सर पर उठा लिया उसने वो डिस्को,
जो बीच मे आया, बोली जल्दी खिसको,
समझ से बाहर था कैसे संभालू इसको।

निक्के निक्के शॉट्स से न बने इसकी बात,
पर सलमान खान के गाने कर देते पूरी सौगात।
लख लख हुल्लारे मारे, एक बार सेट जो होवे,
दिन हो या रात, फिर ना सोवे।

सियप्पा पा दे जो लगा दो जरा सी चाबी,
एक शॉट ओर मांगे जो बजे पंजाबी,
थकने का वो नाम न सित्ता,
डीजे वाले के नाक में दम कर दित्ता।

थोड़ा और थोडा ओर कहके डकार ले बोटल,
वेटर को बोले, 4 पेग ओर फिर  करले टोटल,
रंग बिरंगा पानी पीके लगादे आग,
फिर अगले दो दिन बस खिचड़ी ओर साग।

Friday, 16 March 2018

ये हक़ ह तुमको।

तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको।
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है।

मेरे दिल की, मेरे जज़बात की कीमत क्या है।
उलझे-उलझे से ख्यालात की कीमत क्या है।

मैंने क्यूं प्यार किया तुमने न क्यूं प्यार किया।
इन परेशान सवालात कि कीमत क्या है।

तुम जो ये भी न बताओ तो ये हक़ है तुमको।
मेरी बात और है मैंने तो मुहब्बत की है ।

तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ तूमको।
इश्क़ ही एक हक़ीकत नहीं कुछ और भी है ।

तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ है तुमको
मैंने तुमसे ही नहीं सबसे मुहब्बत की है ।

तुम अगर आँख चुराओ तो ये हक़ है तमको।
तुम अगर मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ ह तुमको।।

Tuesday, 13 March 2018

रिश्तो की दरारें

मकानों के भाव युहीं नही बढ़ रहे साहब,
रिश्तो में ऑडी दरारों का फायदा बिल्डर्स उठा रहे हैं।

कमबख्त मोबाइल

एक अरसा हुआ अल्फाजों को स्याही में भिगाये हुए,
इस कमबख्त मोबाइल में चिट्ठी का वजूद ही खत्म कर दिया।

Sunday, 4 March 2018

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है


मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है


समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता


भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा


Saturday, 3 March 2018

एक पगली लड़की के बिन।।

अमावस की काली रातों में दिल का दरवाजा खुलता है,
जब दर्द की काली रातों में गम आंसू के संग घुलता है,
जब पिछवाड़े के कमरे में हम निपट अकेले होते हैं,
जब घड़ियाँ टिक-टिक चलती हैं,सब सोते हैं, हम रोते हैं,
जब बार-बार दोहराने से सारी यादें चुक जाती हैं,
जब ऊँच-नीच समझाने में माथे की नस दुःख जाती है,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है।

जब पोथे खाली होते है, जब हर्फ़ सवाली होते हैं,
जब गज़लें रास नही आती, अफ़साने गाली होते हैं,
जब बासी फीकी धूप समेटे दिन जल्दी ढल जता है,
जब सूरज का लश्कर छत से गलियों में देर से जाता है,
जब जल्दी घर जाने की इच्छा मन ही मन घुट जाती है,
जब कालेज से घर लाने वाली पहली बस छुट जाती है,
जब बेमन से खाना खाने पर माँ गुस्सा हो जाती है,
जब लाख मन करने पर भी पारो पढ़ने आ जाती है,
जब अपना हर मनचाहा काम कोई लाचारी लगता है,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है।

जब कमरे में सन्नाटे की आवाज़ सुनाई देती है,
जब दर्पण में आंखों के नीचे झाई दिखाई देती है,
जब बड़की भाभी कहती हैं, कुछ सेहत का भी ध्यान करो,
क्या लिखते हो दिन भर, कुछ सपनों का भी सम्मान करो,
जब बाबा वाली बैठक में कुछ रिश्ते वाले आते हैं,
जब बाबा हमें बुलाते है,हम जाते में घबराते हैं,
जब साड़ी पहने एक लड़की का फोटो लाया जाता है,
जब भाभी हमें मनाती हैं, फोटो दिखलाया जाता है,
जब सारे घर का समझाना हमको फनकारी लगता है,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है।

दीदी कहती हैं उस पगली लडकी की कुछ औकात नहीं,
उसके दिल में भैया तेरे जैसे प्यारे जज़्बात नहीं,
वो पगली लड़की मेरी खातिर नौ दिन भूखी रहती है,
चुप चुप सारे व्रत करती है, मगर मुझसे कुछ ना कहती है,
जो पगली लडकी कहती है, मैं प्यार तुम्ही से करती हूँ,
लेकिन मैं हूँ मजबूर बहुत, अम्मा-बाबा से डरती हूँ,
उस पगली लड़की पर अपना कुछ भी अधिकार नहीं बाबा,
सब कथा-कहानी-किस्से हैं, कुछ भी तो सार नहीं बाबा,
बस उस पगली लडकी के संग जीना फुलवारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है।