कभी कहीं मिल जाओ तो मेरी आंखो में मत देखना,
मेरी आंखे वो चिट्ठी है जो तुम्हे कभी मिली ही नही,
इतना कुछ है उनमें, जो तुमने कभी पढ़ा ही नही,
इसलिए नज़रे चुराता हु तुमसे, की वो गीले अल्फाज बरस न पड़ें,
वो अल्फाज जिन्हे पढ़ कर तुम खुद को कभी माफ न कर पाओ,
तुम पूरी जिंदगी खुद को सही मानो,
मैं पूरी जिंदगी खुद को गलत फरमाऊ।
इसलिए जब कही कभी मिल जाओ,
तो गले लगा लेना,
बस मेरी आंखो मे मत देखना।।
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