रूह में लेकर दुनिया की थकान तेरे दर पे चले आये थे हम,
तेरी गौद में रख सर अपना जमाने को अलविदा कर आये थे हम।
खुश लीबासी थी उन महफ़िलो में, फिर भी खुश न थे हम,
तेरे पास आये तो लिबाज़ के जश्न पहन आये थे हम।
रुखसत हुए तूमसे तो दर्द को दुआ समझ पी आये थे हम,
नजर के कुसूर तेरी नजर का था, जो सब कुछ छोड़कर तेरे पास चले आये थे हम।
तेरी आँखों मे हैरत की तरह चले आये थे हम,
तेरे माथे पर मिस्ल के शिकन बन गए थे हम,
तेरे हाथो की लकीरों में हों या न हों, तेरे हाथो की चुड़ियों में बन आये है हम।
बेखुदी की धूल में लिपटे हुए आये थे हम,
बेपरवाह, बिगड़े हुए, बेखौफ चले आये थे हम,
तूने दामन में संभाला, ओर फिर इश्क़ का चोला ओढ़ आये थे हम।।
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