Sunday, 3 March 2019

इंतजार

इंतजार करते थे उनका की दुल्हन बनाएंगे कभी,
दुल्हन बनकर सामने आए एक दिन ख़ैरियत पूछने के लिए...

हम तो तेरे हो गए थे पहले ही,
सिर्फ ये तेरे सवालात ही थे जो अधूरापन छोड़ गए

सुबह शाम दीदार करते थे तेरा,
शादी तूने की तो सजदा पढ़ने लगे तेरे नाम का,
दो लफ्ज़ सच के क्या बोल दिए,
तुम कहने लगे बदल गए हो।।

पानी किस पर फेरोगे ए दोस्त,
तेरी आंखे मेरी जुबांन,
ओर तेरी लिखावट आदत बन चुकी है मेरी...

ये नशा नही मोहब्बतें इश्क़ है,
तेरे पास होने का,
मेरा तुझमे खोने का।।

यादों की दुहाई मत दीजिये मोहतरमा,
यादों से रिश्ता कुछ ज्यादा पुराना है,
हस्ती हुई भीड़ में जब तुम गुम हो गए थे न,
तब इन यादों में डूबकर ही रातें गुजरा करते थे।।

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